Saturday, 31 October 2015

इश्क का नशा

इश्क का नश़ा और हुस्न का नूर है
सब हैं हसीन... तो कौन बे-नूर है
जो है पास... हमे बस उससे है मतलब
क्या वास्ता उससे.. जो नजरों से दूर है।

मैं हूँ

इबादत फरियाद और तलाश हूं मै
बगैर तेरे.. ज़िंदा लाश हूं मै

एक बात पूछता हूं तुझसे सनम
तेरे लिए क्यों इतना ख़ास हूं मै

दूरी चंद लम्हों की ही सही
पर हर वक्त तेरे पास हूं मै