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कुछ इस तरहा मैने तेरे प्यार को देखा है
शर्म से लाल तेरे रुखसार को देखा है
झुकती नहीं मुहब्बत .. ये सुना है अक्सर
मैने हया से झुकते तेरे अब्सार को देखा है
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कुछ इस तरहा मैने तेरे प्यार को देखा है
शर्म से लाल तेरे रुखसार को देखा है
झुकती नहीं मुहब्बत .. ये सुना है अक्सर
मैने हया से झुकते तेरे अब्सार को देखा है
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ये बिन बताए परेशान कौन कर रहा है
खुलेआम ये गुनाह कौन कर रहा है
आ रही हैं हिचकियां बड़ी देर से मुझको
इस तरह से मुझे याद कौन कर रहा है
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इश्क मे बेवफा तेरे .. हम बर्बाद हो गए
छोड़ा है तुझको जब से.. हम शाद हो गए
खैर रिहा हूं मैं झूठी मोहब्बत की जंजीर से
रहकर दूर तुझसे.. हम आबाद हो गए
लेकर दिल कुछ दिया उसने था
एक काम एसा किया उसने था
उम्र भर का गम दिया मुझको
यही एहसान बस किया उसने था.
इश्क का नश़ा और हुस्न का नूर है
सब हैं हसीन... तो कौन बे-नूर है
जो है पास... हमे बस उससे है मतलब
क्या वास्ता उससे.. जो नजरों से दूर है।
इबादत फरियाद और तलाश हूं मै
बगैर तेरे.. ज़िंदा लाश हूं मै
एक बात पूछता हूं तुझसे सनम
तेरे लिए क्यों इतना ख़ास हूं मै
दूरी चंद लम्हों की ही सही
पर हर वक्त तेरे पास हूं मै
हर चीज़ पर हम ज़ोर आज़माइश नहीं करते ।
मोहब्बत की कभी हम पैमाइश नहीं करते ।
है तो है प्यार .. बस हम और तुम को पता है।
हर एक के सामने इसकी हम नुमाइश नहीं करते ।