~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ कुछ इस तरहा मैने तेरे प्यार को देखा है शर्म से लाल तेरे रुखसार को देखा है
झुकती नहीं मुहब्बत .. ये सुना है अक्सर मैने हया से झुकते तेरे अब्सार को देखा है ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
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