Monday, 18 July 2016

नशीली आँख भी... शराब हो सकती है

नशीली आँख भी... शराब हो सकती है
चमक चेहरे की आफ़ताब हो सकती है

मैनें देखा उसे चुपचाप बैठे हुए अक्सर
फ़ितरत से वो हाज़िरजवाब हो सकती है
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- अनुज राठौर
           
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Friday, 1 April 2016

चाहत

मुताबिक ज़रूरतों के... कुछ भी पूरा नहीं होता
रहते हैं अक्सर तनहा... पर कोई मेरा नहीं होता
कट तो जाता है जालिम मेरा वक्त भी बस यूं ही
गुज़र जाती है रात... पर कभी सवेरा नहीं होता
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- अनुज राठौर

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Saturday, 5 December 2015

I See Your Love

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कुछ इस तरहा मैने तेरे प्यार को देखा है
शर्म से लाल तेरे रुखसार को देखा है

झुकती नहीं मुहब्बत .. ये सुना है अक्सर
मैने हया से झुकते तेरे अब्सार को देखा है
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याद कौन कर रहा है

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ये बिन बताए परेशान कौन कर रहा है
खुलेआम ये गुनाह कौन कर रहा है
आ रही हैं हिचकियां बड़ी देर से मुझको
इस तरह से मुझे याद कौन कर रहा है
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जलवा उसकी अदाओं का

ब-चश्मे देखा मैने जलवा उसकी अदाओं का
मोड़ दिया रुख़ भी जिसने चलती हवाओं का

हम शाद हो गए

इश्क मे बेवफा तेरे .. हम बर्बाद हो गए
छोड़ा है तुझको जब से.. हम शाद हो गए
खैर रिहा हूं मैं झूठी मोहब्बत की जंजीर से
रहकर दूर तुझसे.. हम आबाद हो गए

Saturday, 14 November 2015

ज़फा

लेकर दिल कुछ दिया उसने था
एक काम एसा किया उसने था
उम्र भर का गम दिया मुझको
यही एहसान बस किया उसने था.