मुताबिक ज़रूरतों के... कुछ भी पूरा नहीं होता रहते हैं अक्सर तनहा... पर कोई मेरा नहीं होता कट तो जाता है जालिम मेरा वक्त भी बस यूं ही गुज़र जाती है रात... पर कभी सवेरा नहीं होता ~~ - अनुज राठौर
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