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कुछ इस तरहा मैने तेरे प्यार को देखा है
शर्म से लाल तेरे रुखसार को देखा है
झुकती नहीं मुहब्बत .. ये सुना है अक्सर
मैने हया से झुकते तेरे अब्सार को देखा है
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कुछ इस तरहा मैने तेरे प्यार को देखा है
शर्म से लाल तेरे रुखसार को देखा है
झुकती नहीं मुहब्बत .. ये सुना है अक्सर
मैने हया से झुकते तेरे अब्सार को देखा है
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ये बिन बताए परेशान कौन कर रहा है
खुलेआम ये गुनाह कौन कर रहा है
आ रही हैं हिचकियां बड़ी देर से मुझको
इस तरह से मुझे याद कौन कर रहा है
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इश्क मे बेवफा तेरे .. हम बर्बाद हो गए
छोड़ा है तुझको जब से.. हम शाद हो गए
खैर रिहा हूं मैं झूठी मोहब्बत की जंजीर से
रहकर दूर तुझसे.. हम आबाद हो गए