लेकर दिल कुछ दिया उसने था
एक काम एसा किया उसने था
उम्र भर का गम दिया मुझको
यही एहसान बस किया उसने था.
Saturday, 14 November 2015
ज़फा
Saturday, 31 October 2015
इश्क का नशा
इश्क का नश़ा और हुस्न का नूर है
सब हैं हसीन... तो कौन बे-नूर है
जो है पास... हमे बस उससे है मतलब
क्या वास्ता उससे.. जो नजरों से दूर है।
मैं हूँ
इबादत फरियाद और तलाश हूं मै
बगैर तेरे.. ज़िंदा लाश हूं मै
एक बात पूछता हूं तुझसे सनम
तेरे लिए क्यों इतना ख़ास हूं मै
दूरी चंद लम्हों की ही सही
पर हर वक्त तेरे पास हूं मै
Wednesday, 23 September 2015
नुमाइश़ नहीं करते
हर चीज़ पर हम ज़ोर आज़माइश नहीं करते ।
मोहब्बत की कभी हम पैमाइश नहीं करते ।
है तो है प्यार .. बस हम और तुम को पता है।
हर एक के सामने इसकी हम नुमाइश नहीं करते ।
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