मुताबिक ज़रूरतों के... कुछ भी पूरा नहीं होता
रहते हैं अक्सर तनहा... पर कोई मेरा नहीं होता
कट तो जाता है जालिम मेरा वक्त भी बस यूं ही
गुज़र जाती है रात... पर कभी सवेरा नहीं होता
~~
- अनुज राठौर
-------------------------
Whatsapp ~ 8546065853
मुताबिक ज़रूरतों के... कुछ भी पूरा नहीं होता
रहते हैं अक्सर तनहा... पर कोई मेरा नहीं होता
कट तो जाता है जालिम मेरा वक्त भी बस यूं ही
गुज़र जाती है रात... पर कभी सवेरा नहीं होता
~~
- अनुज राठौर
-------------------------
Whatsapp ~ 8546065853
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
कुछ इस तरहा मैने तेरे प्यार को देखा है
शर्म से लाल तेरे रुखसार को देखा है
झुकती नहीं मुहब्बत .. ये सुना है अक्सर
मैने हया से झुकते तेरे अब्सार को देखा है
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
ये बिन बताए परेशान कौन कर रहा है
खुलेआम ये गुनाह कौन कर रहा है
आ रही हैं हिचकियां बड़ी देर से मुझको
इस तरह से मुझे याद कौन कर रहा है
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
इश्क मे बेवफा तेरे .. हम बर्बाद हो गए
छोड़ा है तुझको जब से.. हम शाद हो गए
खैर रिहा हूं मैं झूठी मोहब्बत की जंजीर से
रहकर दूर तुझसे.. हम आबाद हो गए
लेकर दिल कुछ दिया उसने था
एक काम एसा किया उसने था
उम्र भर का गम दिया मुझको
यही एहसान बस किया उसने था.
इश्क का नश़ा और हुस्न का नूर है
सब हैं हसीन... तो कौन बे-नूर है
जो है पास... हमे बस उससे है मतलब
क्या वास्ता उससे.. जो नजरों से दूर है।